विषय · 10 श्लोक

भगवद् गीता में Clarity

भगवद् गीता के 10 श्लोक जो clarity पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.11Speaker: Krishna
श्री भगवानुवाचअशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः
अर्थ · हिन्दी
श्रीभगवान् बोले तुमने शोक न करनेयोग्यका शोक किया है और पण्डिताईकी बातें कह रहे हो परन्तु जिनके प्राण चले गये हैं, उनके लिये और जिनके प्राण नहीं गये हैं, उनके लिये पण्डितलोग शोक नहीं करते ॥
सार
Arjuna is mourning people who should not be mourned, while speaking as if he understands wisdom. Krishna says the wise do not grieve for either the dead or the living.
Clear seeing ends grief where the wise know none is needed.
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भगवद् गीता 2.21Speaker: Krishna
वेदाविनाशिनं नित्यं एनमजमव्ययम्
कथं पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्
अर्थ · हिन्दी
हे पृथानन्दन जो मनुष्य इस शरीरीको अविनाशी, नित्य, जन्मरहित और अव्यय जानता है, वह कैसे किसको मारे और कैसे किसको मरवाये ॥
सार
Anyone who truly sees the inner being as unborn and unchanging cannot think in terms of killing or being killed.
Clear seeing makes violence look absurd.
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भगवद् गीता 2.25Speaker: Krishna
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि
अर्थ · हिन्दी
यह देही प्रत्यक्ष नहीं दीखता, यह चिन्तनका विषय नहीं है और यह निर्विकार कहा जाता है । अतः इस देहीको ऐसा जानकर शोक नहीं करना चाहिये ॥
सार
The true self is not something you can see, think through, or alter. Knowing that, Arjuna should stop grieving.
What is deepest in you was never available for loss.
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