भगवद् गीता में Akshara Brahma
भगवद् गीता के 12 श्लोक जो akshara brahma पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥
अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥
- 8.9अ. 8
Hold the ungraspable source in mind, not the passing form.
जो सर्वज्ञ, पुराण, शासन करनेवाला, सूक्ष्मसेसूक्ष्म, सबका धारणपोषण करनेवाला, अज्ञानसे अत्यन्त परे, सूर्यकी तरह प्रकाशस्वर
- 8.10अ. 8
Steady devotion carries awareness beyond the body's final threshold.
वह भक्तियुक्त मनुष्य अन्तसमयमें अचल मनसे और योगबलके द्वारा भृकुटीके मध्यमें प्राणोंको अच्छी तरहसे प्रविष्ट करके शरीर छोड
- 8.13अ. 8
Final remembrance can carry consciousness beyond the body.
इन्द्रियोंके सम्पूर्ण द्वारोंको रोककर मनका हृदयमें निरोध करके और अपने प्राणोंको मस्तकमें स्थापित करके योगधारणामें सम्यक्
- 8.15अ. 8
True arrival ends the need to come back.
महात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं
- 8.17अ. 8
Cosmic time reveals how small ordinary urgency is.
जो मनुष्य ब्रह्माके एक हज़ार चतुर्युगीवाले एक दिनको और सहस्त्र चतुर्युगीपर्यन्त एक रातको जानते हैं, वे मनुष्य ब्रह्माके द
- 8.23अ. 8
Not every departure leads the same way; some paths return you, others do not.
हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन जिस काल अर्थात् मार्गमें शरीर छोड़कर गये हुए योगी अनावृत्तिको प्राप्त होते हैं अर्थात्
- 8.26अ. 8
Some choices free you from the cycle; others send you back into it.
क्योंकि शुक्ल और कृष्ण ये दोनों गतियाँ अनादिकालसे जगत्प्राणिमात्र के साथ सम्बन्ध रखनेवाली मानी गई हैं । इनमेंसे एक गति
- 8.27अ. 8
Understanding the two paths keeps the mind unshaken.
हे पृथानन्दन इन दोनों मार्गोंको जाननेवाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता । अतः हे अर्जुन तू सब समयमें योगयुक्त हो जा ॥
- 8.28अ. 8
Knowing the way beyond rewards leads to the highest home.
योगी इसको शुक्ल और कृष्णमार्गके रहस्यको जानकर वेदोंमें, यज्ञोंमें, तपोंमें तथा दानमें जोजो पुण्यफल कहे गये हैं, उन सभी प