भगवद् गीता में Dhyana Yoga
भगवद् गीता के 13 श्लोक जो dhyana yoga पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥
शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥
- 6.9अ. 6
Equal vision toward all people marks the highest steadiness.
सुहृद्, मित्र, वैरी, उदासीन, मध्यस्थ, द्वेष्य और सम्बन्धियोंमें तथा साधुआचरण करनेवालोंमें और पापआचरण करनेवालोंमें भी समब
- 6.23अ. 6
Yoga is the breaking of suffering’s grip, practiced steadily.
जिसमें दुःखोंके संयोगका ही वियोग है, उसीको योग नामसे जानना चाहिये । वह योग जिस ध्यानयोगका लक्ष्य है, उस ध्यानयोगका अभ्य
- 6.33अ. 6
Restlessness makes even clear teaching feel unreachable.
अर्जुन बोले हे मधुसूदन आपने समतापूर्वक जो यह योग कहा है, मनकी चञ्चलताके कारण मैं इस योगकी स्थिर स्थिति नहीं देखता हूँ
- 6.37अ. 6
Faith without completion still deserves a clear answer.
अर्जुन बोले हे कृष्ण जिसकी साधनमें श्रद्धा है, पर जिसका प्रयत्न शिथिल है, वह अन्तसमयमें अगर योगसे विचलितमना हो जाय, तो
- 6.38अ. 6
Half-finished striving can feel like total ruin.
हे महाबाहो संसारके आश्रयसे रहित और परमात्मप्राप्तिके मार्गमें मोहित अर्थात् विचलित इस तरह दोनों ओरसे भ्रष्ट हुआ साधक क
- 6.40अ. 6
Sincere effort toward the good cannot end in ruin.
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन उसका न तो इस लोकमें और न परलोकमें ही विनाश होता है क्योंकि हे प्यारे कल्याणकारी काम करने
- 6.45अ. 6
Persistent striving eventually ripens into the highest fulfillment.
परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर पर
- 6.46अ. 6
Inner mastery outranks every outer path.
सकामभाववाले तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है ऐसा मेरा मत
- 18.51अ. 18
Purified resolve cuts the pull of craving and aversion.
जो विशुद्ध सात्त्विकी बुद्धिसे युक्त, वैराग्यके आश्रित, एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक
- 18.52अ. 18
Freedom grows from deliberate simplicity and steady restraint.
जो विशुद्ध सात्त्विकी बुद्धिसे युक्त, वैराग्यके आश्रित, एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक