सत्यमेव जयते: जीत सत्य की ही होती है

सत्यमेव जयते ("सत्य की ही जीत होती है") मुण्डक उपनिषद 3.1.6 का वाक्य है, जो अथर्ववेद का उपनिषद है। ऋषि अंगिरा यह बात गृहस्थ शौनक को सिखाते हैं। श्लोक आगे कहता है कि सत्य से ही देवयान मार्ग बना है, जिस पर ऋषि सत्य के परम धाम तक पहुँचते हैं। यही भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।

मुण्डक उपनिषद 3.1.6

सत्यमेव जयते नानृतं

satyam eva jayate nānṛtam

जीत सत्य की ही होती है, झूठ की नहीं।

पूरा अंश

मुण्डक उपनिषद 3.1.6

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः ।येनाऽऽक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ॥

satyameva jayate nānṛtaṃ satyena panthā vitato devayānaḥ |yenā''kramantyṛṣayo hyāptakāmā yatra tat satyasya paramaṃ nidhānam ||

जीत सत्य की ही होती है, झूठ की नहीं। सत्य से ही देवताओं का मार्ग बिछा है, जिस पर ऋषि, जिनकी सब इच्छाएँ पूरी हो चुकी हैं, सत्य के सबसे ऊँचे धाम तक जाते हैं।

किसने, किससे कहा

शौनक एक बड़े गृहस्थ थे। वे विधि से अंगिरा ऋषि के पास गए और एक ही सवाल पूछा: वह क्या है जिसे जान लेने पर सब कुछ जान लिया जाता है (1.1.3)? पूरा उपनिषद इसी का उत्तर है। तीसरे मुण्डक तक आते आते अंगिरा बताते हैं कि आत्मा सत्य, तप, सही ज्ञान और संयम से मिलता है (3.1.5)। उसके ठीक बाद यह श्लोक आता है।

आचार्य इसे कैसे पढ़ते हैं

शंकराचार्य

शंकराचार्य यहाँ सत्य का अर्थ सच्चा आचरण लेते हैं: जो सच बोलता और सच जीता है, वही जीतता है, झूठा नहीं। और सत्य ही वह रास्ता है जिस पर चलकर ऋषि उस जगह पहुँचे जहाँ सत्य रखा है।

दूसरी बात

सभी आचार्य सीधा अर्थ ही मानते हैं। एक बात लोग अक्सर पूछते हैं: उपनिषद में "जयते" है। कुछ संस्करणों में "जयति" छपा है, अर्थ वही है।

लिखने का सही रूप

  • सत्यमेव जयतेsatyameva jayate
  • सत्यमेव जयते नानृतंsatyam eva jayate nānṛtam

राष्ट्रीय प्रतीक (1950) में अशोक स्तंभ के सिंहों के नीचे देवनागरी में सत्यमेव जयते लिखा है। श्लोक आगे "नानृतं" यानी "झूठ नहीं" कहता है।

सत्यमेव जयते नानृतं (Mundaka Upanishad 3.1.6)

देवनागरी में प्रिंट के लायक कार्ड, 1080 x 1350 पिक्सेल। फ़्रेम, सुलेख या टैटू के लिए पूरे साइज़ में खोलें।

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सत्यमेव जयते नानृतं

satyam eva jayate nānṛtam

जीत सत्य की ही होती है, झूठ की नहीं।

अंगिरा, शौनक से · मुण्डक उपनिषद 3.1.6

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लोग अक्सर पूछते हैं

सत्यमेव जयते किस उपनिषद से लिया गया है?
मुण्डक उपनिषद, श्लोक 3.1.6 से। मुण्डक उपनिषद अथर्ववेद का है।
सत्यमेव जयते का पूरा श्लोक क्या है?
सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम् ॥
सत्यमेव जयते को लोकप्रिय किसने बनाया?
स्वतंत्रता आंदोलन के समय पंडित मदन मोहन मालवीय ने इसे लोगों तक पहुँचाया, ऐसा माना जाता है। 1950 में राष्ट्रीय प्रतीक के साथ यह भारत का आदर्श वाक्य बना।

स्रोत और तरीका

संस्कृत पाठ Wisdom के संग्रह से है, जिसे sanskritdocuments.org के संस्करण से मिलाया गया है। हिंदी और अंग्रेज़ी अर्थ Wisdom का अपना है, शंकराचार्य के भाष्य के आधार पर। अभी इसकी मानवीय समीक्षा चल रही है।