भगवद् गीता में ज्ञानयोग
ज्ञानयोग ज्ञान का मार्ग है: आत्मा को शरीर और कर्म से अलग जानकर मुक्ति पाना।
गीता के 13 श्लोक जो ज्ञानयोग पर हैं, सभी अध्यायों से, क्रम में।
ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् ॥
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ॥
- 4.4अ. 4
अर्जुन उवाचअपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः ।
अर्जुन बोले आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था यह बात मैं कैसे समझूँ ॥
- 4.16अ. 4
किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः ।
कर्म क्या है और अकर्म क्या है इस प्रकार इस विषयमें विद्वान् भी मोहित हो जाते हैं ।
- 4.17अ. 4
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः ।
कर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये और अकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये तथा विकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये क्योंकि कर्मकी गति गहन है ॥
- 4.18अ. 4
कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः ।
जो मनुष्य कर्ममें अकर्म देखता है और जो अकर्ममें कर्म देखता है, वह मनुष्योंमें बुद्धिमान् है, योगी है और सम्पूर्ण कर्मोंको करनेवाला है ॥
- 4.20अ. 4
त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः ।
जो कर्म और फलकी आसक्तिका त्याग करके आश्रयसे रहित और सदा तृप्त है, वह कर्मोंमें अच्छी तरह लगा हुआ भी वास्तवमें कुछ भी नहीं करता ॥
- 4.24अ. 4
ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
जिस यज्ञमें अर्पण भी ब्रह्म है, हवी भी ब्रह्म है और ब्रह्मरूप कर्ताके द्वारा ब्रह्मरूप अग्निमें आहुति देनारूप क्रिया भी ब्रह्म है, ऐसे…
- 4.25अ. 4
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते ।
अन्य योगीलोग भगवदर्पणरूप यज्ञका ही अनुष्ठान करते हैं और दूसरे योगीलोग ब्रह्मरूप अग्निमें विचाररूप यज्ञके द्वारा ही जीवात्मारूप यज्ञका हवन…
- 4.28अ. 4
द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे ।
दूसरे कितने ही तीक्ष्ण व्रत करनेवाले प्रयत्नशील साधक द्रव्यसम्बन्धी यज्ञ करनेवाले हैं, और कितने ही तपोयज्ञ करनेवाले हैं, और दूसरे कितने ही…
- 4.40अ. 4
अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति ।
विवेकहीन और श्रद्धारहित संशयात्मा मनुष्यका पतन हो जाता है । ऐसे संशयात्मा मनुष्यके लिये न यह लोक है न परलोक है और न सुख ही है ॥
- 4.41अ. 4
योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसंछिन्नसंशयम् ।
हे धनञ्जय योग समता के द्वारा जिसका सम्पूर्ण कर्मोंसे सम्बन्धविच्छेद हो गया है और ज्ञानके द्वारा जिसके सम्पूर्ण संशयोंका नाश हो गया है, ऐसे…