विषय · 11 श्लोक

भगवद् गीता में Bhagavan

भगवद् गीता के 11 श्लोक जो bhagavan पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 7.6Speaker: Krishna
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा
अर्थ · हिन्दी
अपरा और परा इन दोनों प्रकृतियोंके संयोगसे ही सम्पूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, ऐसा तुम समझो । मैं सम्पूर्ण जगत् का प्रभव तथा प्रलय हूँ ॥
सार
All beings arise from these two natures. Krishna says he is the source and end of the whole universe.
Everything that appears rises from one source and returns there.
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भगवद् गीता 7.7Speaker: Krishna
मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव
अर्थ · हिन्दी
हे धनञ्जय मेरे बढ़कर इस जगत् का दूसरा कोई किञ्चिन्मात्र भी कारण नहीं है । जैसे सूतकी मणियाँ सूतके धागेमें पिरोयी हुई होती हैं, ऐसे ही यह सम्पूर्ण जगत् मेरेमें ही ओतप्रोत है ॥
सार
Krishna says nothing is greater than him, and the whole world is held together within him like beads on a string.
Everything is held in one sustaining reality.
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भगवद् गीता 9.4Speaker: Krishna
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना
मत्स्थानि सर्वभूतानि चाहं तेष्ववस्थितः
अर्थ · हिन्दी
यह सब संसार मेरे निराकार स्वरूपसे व्याप्त है । सम्पूर्ण प्राणी मेरेमें स्थित हैं परन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ तथा वे प्राणी भी मुझ में स्थित नहीं हैं मेरे इस ईश्वरसम्बन्धी योगसामर्थ्य को देख सम्पूर्ण प्राणियोंको उत्पन्न करनेवाला और उनका धारण, भरणपोषण करनेवाला मेरा स्वरूप उन प्राणियोंमें स्थित नहीं है ॥
सार
Krishna says the whole universe is sustained by his unseen presence. Every being exists within him, yet he is not limited by any being.
The supreme reality holds everything without being held by anything.
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