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अभी नहीं
उघरहिं अंत न होइ निबाहू।कालनेमि जिमि रावन राहू॥अर्थ और प्रसंग
अभी नहीं · रुकें और जाँचें · श्रीरामचरितमानस, बालकाण्ड · आरंभ की वंदना · गोस्वामी तुलसीदास
‘उघरहिं अंत न होइ निबाहू’ श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड की चौपाई है, जिसमें तुलसीदास कहते हैं कि कपट अंत में खुल जाता है, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का खुला। श्रीराम शलाका प्रश्नावली में यह ‘अभी नहीं’ का संकेत है: आगे बढ़ने से पहले कपट को पहचानें और सुधारें।
संसार में जो ठग सुंदर वेश बनाए रहते हैं, लोग वेश के प्रभाव से उनकी भी पूजा करते हैं।
Cheats who wear a fine disguise are honoured by the world for the sake of the disguise.
शलाका का उत्तर
उघरहिं अंत न होइ निबाहू।कालनेमि जिमि रावन राहू॥
ugharahiṃ anta na hoi nibāhū,kālanemi jimi rāvana rāhū
कपट अंत में खुल जाता है, उसका निबाह नहीं होता, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का हुआ।
Pretense is exposed in the end and cannot last, as it was with Kalanemi, Ravana and Rahu.
अर्थ
कपट अंत में खुल जाता है, उसका निबाह नहीं होता, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का हुआ।
In English: Pretense is exposed in the end and cannot last, as it was with Kalanemi, Ravana and Rahu.
प्रसंग
तुलसीदास कहते हैं कि जो अच्छा वेश धरकर ठगते हैं, उनका कपट अंत में खुलता है। कालनेमि साधु बनकर हनुमान को रोकना चाहता था, राहु देवता बनकर अमृत पी गया, रावण साधु बनकर सीता को ले गया।
In English: Tulsidas says those who wear a good disguise to deceive are exposed in the end. Kalanemi posed as a sage to stop Hanuman, Rahu as a god to drink nectar, Ravana as a monk to take Sita.
यह चौपाई आपसे क्या माँगती है
इस काम में कहीं कपट है, आपका या किसी और का। आगे बढ़ने से पहले उसे सुधारें।
परंपरा में संकेत
अभी नहीं · रुकें और जाँचें
परंपरा में इसे ‘अभी नहीं’ का उत्तर माना जाता है। इसे रुककर जाँचने का संकेत मानें और चौपाई की बात पर मनन करें।
चौपाई श्रीरामचरितमानस के पाठ से है, और यह गीता प्रेस, गोरखपुर की मानस के साथ छपी श्रीराम शलाका प्रश्नावली के नौ उत्तरों में से एक है। अर्थ, प्रसंग और ‘आपसे क्या माँगती है’ Wisdom के अपने शब्द हैं, गीता प्रेस परंपरा की टीका के अनुसार।