यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् । तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः ॥
हिन्दी अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र अर्जुन मनुष्य अन्तकाल में जिसजिस भी भावका स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है वह उस अन्तकालके भावसे सदा भावित होता हुआ उसउसको ही प्राप्त होता है अर्थात् उसउस योनिमें ही चला जाता है ॥
English
Whatever state a person remembers at the end, that state is reached, because the mind has been shaped by it.