श्री भगवानुवाचपश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः । नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च ॥
हिन्दी अनुवाद
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन अब मेरे अनेक तरहके, अनेक अनेक वर्णों और आकृतियोंवाले सैकड़ोंहजारों दिव्यरूपोंको तू देख ॥
English
The Blessed Lord said: See, Partha, my forms in hundreds and thousands, diverse, divine, and of many colors and shapes.