यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदाऽऽत्मानं सृजाम्यहम् ॥
Hindi · हिन्दी
हे भरतवंशी अर्जुन जबजब धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है, तबतब ही मैं अपनेआपको साकाररूपसे प्रकट करता हूँ ॥
English
Whenever there is a decline of dharma and a rise of adharma, I manifest myself.