समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् । न हिनस्त्यात्मनाऽऽत्मानं ततो याति परां गतिम् ॥
Hindi · हिन्दी
क्योंकि सब जगह समरूपसे स्थित ईश्वरको समरूपसे देखनेवाला मनुष्य अपनेआपसे अपनी हिंसा नहीं करता, इसलिये वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है ॥
English
Seeing the divine equally everywhere, a person does not wound the true self by the true self, and reaches the highest state.