अभिसंधाय तु फलं दम्भार्थमपि चैव यत् । इज्यते भरतश्रेष्ठ तं यज्ञं विद्धि राजसम् ॥
Hindi · हिन्दी
परन्तु हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन जो यज्ञ फलकी इच्छाको लेकर अथवा दम्भदिखावटीपन के लिये भी किया जाता है, उसको तुम राजस समझो ॥
English
But, best of the Bharatas, know that sacrifice to be rajasic when it is performed for reward or for show.