रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः । प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु ॥
Hindi · हिन्दी
हे कुन्तीनन्दन जलोंमें रस मैं हूँ, चन्द्रमा और सूर्यमें प्रभा प्रकाश मैं हूँ, सम्पूर्ण वेदोंमें प्रणव ओंकार मैं हूँ, आकाशमें शब्द और मनुष्योंमें पुरुषार्थ मैं हूँ ॥
English
O son of Kunti, I am the taste in water, the light in the moon and sun, the syllable Om in all the Vedas, the sound in space, and the valor in human beings.